काश आती घटा से छनकर चांदनी यूँ कुछ जैसे मुस्कुराहटें तेरी जुल्फों से छनकर आती हैं. बीतते लम्हे, सांस-दर-सांस सुनाती तुम कुछ और सुनती कुछ हर सांस के साथ मेरे मन की.
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